Saturday, 2 April 2016

01-04-2016 

सात महिलाओं को चार्जशीट, निलंबन वापस, 8वीं ने गलती स्वीकारी, मुख्य आरोपी फरार
सीपीओ और एसडीजीएम की आज रेलवे बोर्ड में पेशी, जल्दी ही उनका बाहर जाना निश्चित
फर्जी शारीरिक शोषण के आरोपों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल करने की तैयारी
यदि अभी यूनियन पर काबू नहीं किया गया, तो कभी अपनी गर्दन नहीं उठा सकेगा रेल प्रशासन
- सुरेश त्रिपाठी, संपादक रेलवे समाचार
दक्षिण रेलवे में प्रशासन और यूनियन के बीच पिछले करीब 15-20 दिनों से चल रहे घमासान पर स्थानीय अखबारों में प्रकाशित खबरों के बावजूद चूंकि मामला चेन्नई तक सीमित था, इसलिए रेलवे बोर्ड और अन्य जोनल रेलों के अधिकारियों को बहुत कुछ मालूम नहीं हो पाया था. परंतु 29 मार्च को ‘दक्षिण रेलवे मजदूर यूनियन : मान्यताप्राप्त ट्रेड यूनियन या माफिया?’ शीर्षक से ‘रेलवे समाचार’ द्वारा अपनी वेबसाइट पर विस्तृत खबर प्रकाशित किए जाने के बाद रेलवे बोर्ड सहित सभी जोनल रेलों के अधिकारी इस पूरे मामले से बखूबी वाकिफ हो गए और तब जाकर रेलवे बोर्ड पर सक्रिय होने का भारी दबाव बना. इसके परिणामस्वरूप अगले ही दिन दक्षिण रेलवे के सीपीओ और एसडीजीएम को दिल्ली तलब कर लिया गया.
विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दक्षिण रेलवे के मुख्य कार्मिक अधिकारी (सीपीओ) स्वामीनाथन और वरिष्ठ उप महाप्रबंधक (एसडीजीएम) आर. मुकुंदन को ‘रेलवे समाचार’ की उपरोक्त शीर्षक खबर के तुरंत बाद गुरूवार, 31 मार्च, यानि आज रेलवे बोर्ड में तलब किया गया है. सूत्रों का यह भी कहना है कि अब इन दोनों अधिकारियों का दक्षिण रेलवे से बाहर तबादला निश्चित है. सूत्रों का कहना है कि इनके ट्रांसफर आदेश आज ही जारी हों, या फिर हप्ते भर बाद, मगर इनका दक्षिण रेलवे से बाहर जाना अब सुनिश्चित हो चुका है. सूत्रों ने बताया कि रेलवे बोर्ड को भी अब यह लगभग पूरा विश्वास हो चुका है कि रेल प्रशासन और यूनियन के बीच विवाद को बढ़ाने अथवा हवा देने तथा निर्धारित समयांतराल पर रेलकर्मियों एवं अधिकारियों के ट्रांसफर करने के मामलों में सीवीसी एवं रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देशों को लागू नहीं कराने के लिए यह दोनों अधिकारी ही पूरी तरह से जिम्मेदार हैं, यदि इस मामले में इन दोनों की यूनियन के साथ मिलीभगत और प्रशासन के साथ भीतरघात नहीं होती, और यदि यह दोनों अधिकारी निर्धारित नियम-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराते, तो यूनियन और प्रशासन के बीच औद्योगिक संबंधों को इतना नुकसान नहीं पहुंचा होता.
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन 9 महिला रेलकर्मियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई थी और जिन्हें घटना के दूसरे ही दिन निलंबित कर दिया गया था, उनमें से सात महिला कर्मियों ने न सिर्फ लिखित रूप से अपनी गलती स्वीकार कर ली है, बल्कि अपने बेजा कृत्य के लिए रेल प्रशासन से माफी भी मांगी है. तथापि, उन्हें बुधवार, 30 मार्च को चार्जशीट थमाते हुए उनका निलंबन खत्म कर दिया गया है. हालांकि 8वीं महिला ने फिलहाल लिखित में तो कुछ नहीं दिया है, बल्कि स्वयं को छिपाए रखकर उसने जो बातचीत अपनी सहयोगियों से की थी, उसकी रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया में घूम रही है. जिससे स्पष्ट है कि वह भी अपनी गलती स्वीकार कर रही है. प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जिस दिन वह ड्यूटी ज्वाइन करने आएगी, उसी दिन उसे चार्जशीट देकर उसका भी निलंबन वापस ले लिया जाएगा. इस सबके अलावा मुख्य आरोपी, जो कि यूनियन की पदाधिकारी बताई जाती है और जिसके नाम से यूनियन ने सीसीएम के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है, फरार है. सूत्रों का कहना है कि उसके बारे में प्रशासन ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है.
पुलिस ने इस बात को स्पष्ट किया है कि जिस एनी रेगिना नामक महिला के नाम से सीसीएम के खिलाफ शिकायत की गई है, वह खुद पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत लेकर नहीं आई थी, बल्कि द.रे.म.यू. का एक पदाधिकारी उक्त लिखित शिकायत लेकर पुलिस स्टेशन आया था. पुलिस का यह भी कहना है कि उक्त महिला अब तक एक बार भी पुलिस के सामने नहीं आई है और न ही उसका कोई संपर्क पुलिस से हो पा रहा है, क्योंकि महिला ने शिकायत में अपना कोई संपर्क नंबर नहीं लिखा है. इससे मामले की जांच कार्रवाई भी अब तक आगे नहीं बढ़ पाई है. प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त कथित फर्जी शिकायत में महिला ने सीसीएम के विरुद्ध आरोप लगाते हुए कहा है कि ‘सीसीएम ने उसके साथ ‘तुम्हारी शक्ल-सूरत ही ऐसी बनी हुई है कि तुम्हारी तरफ तो कोई आदमी देखेगा भी नहीं, जैसे अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए उसका शारीरिक शोषण भी किया.’
हालांकि व्यंग्य में जानकारों का कहना है कि 15-20 फुट दूर बैठकर कोई अधिकारी किसी महिला का शारीरिक शोषण कैसे और किस तरह कर सकता है, और यदि वास्तव में ऐसा हो सकता है, तब तो ऐसे अधिकारीगण अवश्य ही ‘वेदव्यास’ के खानदानी होंगे!! उनका कहना है कि ऐसे ही बेसिर-पैर के आरोप लगाकर अब तक रेल प्रशासन और कई अधिकारियों को ब्लैकमेल किया जाता रहा है, और अब तक न सिर्फ कई अधिकारियों का कैरियर खराब किया जा चुका है, बल्कि उन्हें तमाम जिल्लत झेलते हुए चेन्नई से बाहर ट्रांसफर भी झेलना पड़ा है.
इस संदर्भ में सूत्रों ने एक अत्यंत विश्वसनीय जानकारी देते हुए बताया कि द. रे. में कुछ खास और गिनी-चुनी महिला कर्मियों का गैर-इस्तेमाल करके अब तक निर्बाध चली आ रही यूनियन की इस ब्लैकमेलिंग के खिलाफ जल्दी ही सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल किए जाने की तैयारी की जा रही है. सूत्रों का कहना है कि जिस तरह दहेज़ विरोधी कानून की धारा 498-ए के खिलाफ मुहिम की शुरुआत चेन्नई से हुई थी और मद्रास हाई कोर्ट ने इस पर ऐतिहासिक फैसला दिया था, जिसकी पुष्टि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी कर दी थी, उसी तरह इस तथाकथित ‘शारीरिक शोषण’ के खिलाफ भी शुरुआत चेन्नई से ही होने जा रही है. उनका यह भी कहना था कि इसके साथ ही न सिर्फ रेल प्रशासन की सारी लाचारी या नपुंशकता खुलकर सामने आ जाएगी, बल्कि यूनियन की मनमानी और उसके पदाधिकारियों द्वारा अब तक कमाई गई अकूत संपत्ति की भी कलई खुल जाएगी.
इस दरम्यान पता चला है कि यूनियन का शीर्ष पदाधिकारी (पूर्व पार्सल पोर्टर), जो कि हमेशा स्कार्पियो अथवा मर्सडीज बेंज या ऐसी ही किन्हीं अन्य महंगी कारों पर द.रे. मुख्यालय में आता-जाता था, वह बुधवार, 30 मार्च को अपने एक कार्यकर्ता की स्कूटर में पीछे बैठकर किसी बहुरूपिये की तरह चोरी-छिपे महाप्रबंधक को मिलने और उनसे यह कहने गया था कि वह अपना व्यक्तिगत हस्तक्षेप करके इस मामले का कोई सम्मानजनक हल करवाएं. परंतु सूत्रों का कहना है कि महाप्रबंधक वशिष्ठ जौहरी ने न सिर्फ उसे शालीनतापूर्वक भगा दिया, बल्कि इस मामले में कोई हस्तक्षेप करने से यह कहकर इंकार कर दिया कि वह इस पर अपने अधिकारियों के पक्ष में खड़े हैं.
जानकारों का मानना है कि यह सही समय है जब रेल प्रशासन द्वारा इस पूर्व पार्सल पोर्टर की नाक दबाकर यूनियन की मनमानियों पर लगाम कसी जा सकती है, और यदि अब भी रेल प्रशासन इस काम में कोई कोताही बरतता है, तो न सिर्फ हमेशा के लिए वह रेल प्रशासन पर हावी हो जाएगा, बल्कि फिर न तो कोई अधिकारी और न ही खुद रेल प्रशासन कभी उसके सामने अपनी गर्दन उठा सकेगा. जबकि जानकारों ने ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन को अपनी छवि बचाए रखने के लिए फिलहाल इस मामले से एक निश्चित दूरी बनाए रखने की सलाह दी है.

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